Monday, 10 December 2018
डारी गयो मनमोहन पासी
डारी गयो मनमोहन पासी।।टेक।।
आँबाँ की डालि कोइल इक बोलै, मेरो मरण अरू जग केरी हाँसी।
विरह की मारी मै बन बन डोलूँ, प्रान तजूँ करवत ल्यूँ कासी।
मीराँ रे प्रभु हरि अबिनासी, तुम मेरे ठाकुर मैं तेरी दासी।।
पाठांतर
डर गयोरी मन मोहनपास, डर गयोरी मन मोहनपास॥१॥
बीरहा दुबारा मैं तो बन बन दौरी। प्राण त्यजुगी करवत लेवगी काशी॥२॥
मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। हरिचरणकी दासी॥३॥
आँबाँ की डालि कोइल इक बोलै, मेरो मरण अरू जग केरी हाँसी।
विरह की मारी मै बन बन डोलूँ, प्रान तजूँ करवत ल्यूँ कासी।
मीराँ रे प्रभु हरि अबिनासी, तुम मेरे ठाकुर मैं तेरी दासी।।
पाठांतर
डर गयोरी मन मोहनपास, डर गयोरी मन मोहनपास॥१॥
बीरहा दुबारा मैं तो बन बन दौरी। प्राण त्यजुगी करवत लेवगी काशी॥२॥
मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। हरिचरणकी दासी॥३॥
Subscribe to:
Post Comments
(
Atom
)
No comments :
Post a Comment