Thursday, 13 December 2018
धूतारा जोगी एकरसूँ हँसि बोल
धूतारा जोगी एकरसूँ हँसि बोल।।टेक।।
जगत बदीत करी मनमोहन, कहा बजावत ढोल।
अंग भभूति गले मृगछाला, तू जन गुढ़िया खोल।
सदन सरोज बदन की सोभा, ऊभी जोऊँ कपोल।
सेली नाद बभूत न बटवो, अजूँ मुनी मुख खोल।
चढ़ती बैस नैण अणियाले, तूं धरि धरि मत डोल।
मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, चेरी भई बिन मोल।।
जगत बदीत करी मनमोहन, कहा बजावत ढोल।
अंग भभूति गले मृगछाला, तू जन गुढ़िया खोल।
सदन सरोज बदन की सोभा, ऊभी जोऊँ कपोल।
सेली नाद बभूत न बटवो, अजूँ मुनी मुख खोल।
चढ़ती बैस नैण अणियाले, तूं धरि धरि मत डोल।
मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, चेरी भई बिन मोल।।
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