Saturday, 8 December 2018

काँई म्हारो जमण बारम्बर।

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काँई म्हारो जमण बारम्बर। 
पूरबला कोई पुन्न खूँट्याँ माणसा अवतार। 
बढ़्या छिण छिण घट्या पल पल, जात णा कछु बार। 
बिरछरां जो पात टूट्या, लाया णा फिर डार। 
भो समुन्द अपार देखां अगम ओखी धार। 
लाल गिरधर तरण तारण, बेग करस्यो पार। 
दासी मीराँ लाल गिरधर, जीवणा दिन च्यार।।

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