Tuesday, 4 December 2018

आली, म्हांने लागे वृन्दावन नीको

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आली, म्हांने लागे वृन्दावन नीको।।टेक।।
घर घर तुलसी ठाकुर पूजा दरसण गोविन्दजी को॥
निरमल नीर बहत जमुना में, भोजन दूध दही को।
रतन सिंघासन आप बिराजैं, मुगट धर्‌यो तुलसी को॥
कुंजन कुंजन फिरति राधिका, सबद सुनन मुरली को।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, भजन बिना नर फीको॥

पाठांतर
आली म्हाँणे लागाँ बृन्द्रावण नीकाँ।।टेक।। 
घर-घर तुलसी ठाकर पूजां, दरसण गोविन्द जी काँ। 
निरमल नीर बह्या जमणाँ माँ, भोजण दूध दही काँ। 
रतण सिंघासण आप बिराज्याँ, मुगुट धर्यां तुलसी काँ। 
कुँजन-कुँजन फिर्या सांवरा, सबद सुण्या मुरली काँ। 
मीरां रे प्रभु गिरधरनागर, भजण बिणआ नर फीकाँ।।

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