Monday, 17 December 2018
मन अटकी मेरे दिल अटकी
मन अटकी मेरे दिल अटकी। हो मुगुटकी लटक मन अटकी॥टेक॥
माथे मुकुट कोर चंदनकी। शोभा है पीरे पटकी॥१॥
शंख चक्र गदा पद्म बिराजे। गुंजमाल मेरे है अटकी॥२॥
अंतर ध्यान भये गोपीयनमें। सुध न रही जमूना तटकी॥३॥
पात पात ब्रिंदाबन धुंडे। कुंज कुंज राधे भटकी॥४॥
जमुनाके नीर तीर धेनु चरावे। सुरत रही बनशी बटकी॥५॥
फुलनके जामा कदमकी छैया। गोपीयनकी मटुकी पटकी॥६॥
मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। जानत हो सबके घटकी॥७॥
माथे मुकुट कोर चंदनकी। शोभा है पीरे पटकी॥१॥
शंख चक्र गदा पद्म बिराजे। गुंजमाल मेरे है अटकी॥२॥
अंतर ध्यान भये गोपीयनमें। सुध न रही जमूना तटकी॥३॥
पात पात ब्रिंदाबन धुंडे। कुंज कुंज राधे भटकी॥४॥
जमुनाके नीर तीर धेनु चरावे। सुरत रही बनशी बटकी॥५॥
फुलनके जामा कदमकी छैया। गोपीयनकी मटुकी पटकी॥६॥
मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। जानत हो सबके घटकी॥७॥
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