Monday, 17 December 2018

मन रे परसि हरिके चरण

No comments :

मन रे परसि हरिके चरण।

सुभग सीतल कंवल कोमल, त्रिविध ज्वाला हरण।
जिण चरण प्रहलाद परसे, इंद्र पदवी धरण।।

जिण चरण ध्रुव अटल कीन्हे, राख अपनी सरण।
जिण चरण ब्रह्मांड भेट्यो, नखसिखां सिर धरण।।

जिण चरण प्रभु परसि लीने, तेरी गोतम घरण।
जिण चरण कालीनाग नाथ्यो, गोप लीला-करण।।

जिण चरण गोबरधन धारयो, गर्व मधवा हरण।
दासि मीरा लाल गिरधर, अगम तारण तरण।।

पाठांतर
मण में परस हरि के चरण ।।टेक।।
सुभग सीतल कवल कोमल, जगत ज्वाला, हरण। 
इण चरण प्रहलाद परस्याँ, इन्द्र पदवी धरण। 
इण चरण ध्रुव अटल करस्यां, सरण असरण सरण। 
इण चरण ब्रह्माण्ड भेट्याँ, नखसिखाँ सिर भरण। 
इण चरण कालियाँ नाथ्यां, गोपीलीला करण। 
इण चरण गोबरधन धारयाँ गरब मधवा हरण। 
दासि मीराँ लाल गिरधर, अगम तारण तरण।।

No comments :

Post a Comment

{js=d.createElement(s);js.id=id;js.src=p+'://platform.twitter.com/widgets.js';fjs.parentNode.insertBefore(js,fjs);}}(document, 'script', 'twitter-wjs');