Sunday, 23 December 2018

म्हाणो चाकर राखां जी गिरधारी लाला चाकर राखां जी

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म्हाणो चाकर राखां जी गिरधारी लाला चाकर राखां जी।।टेक।। 
चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ। 
बिन्द्राबन री कुँज गलिन माँ, गोविन्द लीला मास्यूँ। 
चाकरी में दरसण पास्यूँ, जणम जणम री तरसी। 
मोर मुकुट पीताम्बर सोहां, गल बैजन्ती मालो। 
बिन्द्रावन मां धेण चरावां, मोहन मुरली वालो। 
हरे हरे णवा कुँज लागस्यूँ, बीचा बीचा बारी। 
सांवरिया रो दरसण पास्यूँ पहण कुसुम्बी सारी। 
मीरां रे प्रभु गिरधरनागर, हिवड़ो घणो अधीरा। 
आधी रात प्रभु दरसण दीस्यों, हिवड़ो घणओ अधीरा। 
आधी रात प्रभु दरसण दीस्यों, जमण जी रे तीरा।।

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