Sunday, 23 December 2018
म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा
म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा।।
तन मन धन सब भेंट धरूंगी भजन करूंगी तुम्हारा।
म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा।।
तुम गुणवंत सुसाहिब कहिये मोमें औगुण सारा।।
म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा।।
मैं निगुणी कछु गुण नहिं जानूं तुम सा बगसणहारा।।
म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा।।
मीरा कहै प्रभु कब रे मिलोगे तुम बिन नैण दुखारा।।
म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा।।
तन मन धन सब भेंट धरूंगी भजन करूंगी तुम्हारा।
म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा।।
तुम गुणवंत सुसाहिब कहिये मोमें औगुण सारा।।
म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा।।
मैं निगुणी कछु गुण नहिं जानूं तुम सा बगसणहारा।।
म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा।।
मीरा कहै प्रभु कब रे मिलोगे तुम बिन नैण दुखारा।।
म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा।।
पाठांतर
म्हाँरे घर आज्यो प्रियतम प्यारा, तुम बिन सब जग खारा।।टेक।।
तन मन धन सब भेंट करूँ, ओ भजन करूँ मैं थारा।
तुम गुणवंत बड़े गुणसागर, मैं हूँ जी औगणहारा।
मैं निगुणी गुण एकौ नाहीं तुम हो बगसण हारा।
मीराँ कहे प्रभु कबहि मिलौगे, थाँ बिन नैण दुष्यारा।।
म्हाँरे घर आज्यो प्रियतम प्यारा, तुम बिन सब जग खारा।।टेक।।
तन मन धन सब भेंट करूँ, ओ भजन करूँ मैं थारा।
तुम गुणवंत बड़े गुणसागर, मैं हूँ जी औगणहारा।
मैं निगुणी गुण एकौ नाहीं तुम हो बगसण हारा।
मीराँ कहे प्रभु कबहि मिलौगे, थाँ बिन नैण दुष्यारा।।
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