Monday, 24 December 2018

म्हांरो जणम जणम रो साथी

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म्हांरो जणम जणम रो साथी, थाँने णा बिसार्यां दिन राती।।टेक।।
थां देख्यां बिण कल न पड़ताँ जामे म्हारी छाती।
ऊचां चढ़चढ़ पंथ निहार्यां कलप कलप अँडियां राती।
भी सागर जग बँधण झूंठां, झूंठा कुलार न्याती।
पल पल थारो रूप निहारां निरख निरखती मदमांती।
मीरां रे प्रभु गिरधरनागर, हरि चरणां चित रांती।।

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