Sunday, 23 December 2018

मोहन आवनकी साई किजोरे

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मोहन आवनकी साई किजोरे। आवनकी मन भावनकी॥टेक॥
आप न आवे पतिया न भेजे | ए बात ललचावनकी॥१॥
बिन दरशन व्याकुल भई सजनी। जैशी बिजलीयां श्रावनकी॥२॥
क्या करूं शक्ति जाऊं मोरी सजनी। पांख होवे तो उडजावनकी॥३॥
मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर | इच्छा लगी हरी बतलावनकी॥४॥

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