Thursday, 20 December 2018

मुझ अबला ने मोटी नीरांत थई रे

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मुझ अबला ने मोटी नीरांत थई रे। 
छामलो घरेणु मारे सांचुँ रे।।टेक।। 
बाली घड़ावुँ बिट्ठल बर वेरी, हार हरि नो मारे हैये रे। 
चित्त माला चतुरमुज चुड़लो, शिद सोनी घरे जइये रे। 
झांझरिया जगजीवन केरा, कृष्णाजी कड़ला ने कांवी रे। 
बिछिया घुंघरा रामनारायण ना अणवट अन्तरजामी रे। 
पेटी घड़ावुँ पुरूषोत्तम केरी, त्रीकम नाम नूं तालूँ रे। 
कूची कराबूँ करूणानन्द केरी, तेमां घरेणु मांरूँ घालुँ रे। 
सासर वासो सजी से बैठी, हवे नथी कँई कांचूँ रे। 
मीरां कहे प्रभु गिरधरनागर, हरिने चरण जाचूँ रे।।

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