Thursday, 13 December 2018

नहिं भावै थांरो देसड़लो जी रंगरूड़ो

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नहिं भावै थांरो देसड़लो जी रंगरूड़ो॥
थांरा देसा में राणा साध नहीं छै, लोग बसे सब कूड़ो।
गहणा गांठी राणा हम सब त्यागा, त्याग्यो कररो चूड़ो॥
काजल टीकी हम सब त्याग्या, त्याग्यो है बांधन जूड़ो।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर बर पायो छै रूड़ो॥


पाठांतर
नहिं भावै थाँरो देसलडो रँगरूडो।।टेक।। 
थाँरे देसाँ में राणा साध नहीं छै, लोग बसै सब कूड़ो। 
गहना गाँठी राणा हम सब त्यागा, त्याग्यो कररो चूड़ो। 
काजल टीकी हम सब त्यागां, त्याग्यो छै बांधन जूड़ो। 
मीरां के प्रभु गिरधरनागर, बर पायो छै पूरो।।

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