Thursday, 13 December 2018

नंदननंदन मण भायां णभ छायां

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नंदननंदन मण भायां णभ छायां।।टेक।।
इत घन गरजां उत घन लरजां, चमकां बिज्जु डरायां। 
उमड़ घुमड घण छायां, पवण चल्यां पुरवायां। 
दादुर मोर पपीहा बोलां, कोयल सबद सुणायां। 
मीरां रे प्रभु गिरधरनागर, चरण केवल चितलायां।।

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