Saturday, 1 December 2018

नाथ निरंजन आरती साजै ।

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  नाथ निरंजन आरती साजै । 
                  गुरु के सबदूं झालरि बाजे ।।
 
अनहद नाद गगन में गाजै, परम जोति तहाँ आप विराजै । 
दीपक जोति अषडत बाती, परम जोति जगै दिन राती । 
सकल भवन उजियारा होई, देव निरंजन और न कोई । 
अनत कला जाकै पार न पावै, संष मृदंग धुनि बैनि बजावै । 
स्वाति बूँद लै कलस बन्दाऊँ, निरति सुरति लै पहुप चढाऊँ । 
निज तत नांव अमूरति मूरति, सब देवां सिरि उद्बुदी सूरति । 
आदिनाथ नाती मछ्न्द्र ना पूता, आरती करै गोरष ओधूता ।

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