Sunday, 16 December 2018

परम सनेही राम की नीति ओलूँ री आवै

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परम सनेही राम की नीति ओलूँ री आवै।।टेक।।
राम हमारे हम हैं राम के, हरि बिन कछू न सुहावै। 
आवण कह गये अजहूँ न आये, जिवड़ो अति उकलावै। 
तुम दरसण की आस रमैया, कब हरि दरस दिलावै। 
चरण कवल की लगनि लगी नित, बिन दरसण दुख पावै। 
मीराँ कूँ प्रभु दरसण दीज्यौ आँणद बरण्यूँ न जावै।।

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