Sunday, 16 December 2018

पिया मोहिं दरसण दीजै, हो

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पिया मोहिं दरसण दीजै, हो। 
बेर बेर में टेरहूँ, अहे क्रिया कीजै, हो।।टेक।। 
जेठ महीने जल बिना, पंछी दुख होई, हो। 
मोर आसाढ़ा कुरलहे, धन चात्रग सोई, हो। 
सावण में झड़ गालियो, सखि तीजाँ केलै, हो। 
भादवै नदिया बहै, दूरी जिन मेलै, हो। 
सीप स्वाति ही भेलती, आसोजाँ सोई, हो। 
देव काती में पूजहे, मेरे तुम होई, हो। 
मगसर ठंड बहोंती पड़ै, मोहि बेगि सम्हालो हो। 
पोस मही पाल घणा, अबही तुम न्हालो हो। 
महा महीं बसंत पंचमी, फागाँ सब गावै हो। 
फागुण फागा खेल है, बणराइ जरावै हो। 
चैत चित्त में ऊपजी, दरसण तुम दीजे हो। 
बैसाख बणराइ फलवै, कोइल कुरलीजै, हो। 
काग उडावन दिय गाय, बूनूँ पिडत जोसी हो। 
मीराँ बिरहणि व्याकुली, दरसण कब होसी हो।।

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