Sunday, 16 December 2018
प्रभुजी थें कहाँ गया, नेहड़ो लगाय।
प्रभुजी थें कहाँ गया, नेहड़ो लगाय।
छोड़ गया बिस्वास संगाती प्रेम की बाती बलाय।।
बिरह समंद में छोड़ गया छो नेहकी नाव चलाय।
मीरा के प्रभु कब रे मिलोगे तुम बिन रह्यो न जाय।।
पाठांतर
प्रभुजी थें कहाँ गया नेहड़ा लगाय।।टेक।।
छोड़या म्हाँ विस्वास सँघाती, प्रेम री बाती जलाय।
बिरह समेद में छोड़ गया छो, नेह री नाव चलाय।
मीराँ रे प्रभु कबेर मिलोगे थे बिण रह्याँ ण जाय।।
छोड़ गया बिस्वास संगाती प्रेम की बाती बलाय।।
बिरह समंद में छोड़ गया छो नेहकी नाव चलाय।
मीरा के प्रभु कब रे मिलोगे तुम बिन रह्यो न जाय।।
पाठांतर
प्रभुजी थें कहाँ गया नेहड़ा लगाय।।टेक।।
छोड़या म्हाँ विस्वास सँघाती, प्रेम री बाती जलाय।
बिरह समेद में छोड़ गया छो, नेह री नाव चलाय।
मीराँ रे प्रभु कबेर मिलोगे थे बिण रह्याँ ण जाय।।
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