Sunday, 16 December 2018
प्यारे दरसन दीज्यो आय, तुम बिन रह्यो न जाय
प्यारे दरसन दीज्यो आय, तुम बिन रह्यो न जाय।।
जल बिन कमल, चंद बिन रजनी, ऐसे तुम देख्याँ बिन सजनी।
आकुल व्याकुल फिरूँ रैन दिन, बिरह कालजो खाय।।
दिवस न भूख, नींद नहिं रैना, मुख सूं कथत न आवे बैना।
कहा कहूँ कछु कहत न आवै, मिलकर तपत बुझाय।।
क्यूँ तरसावो अन्तरजामी, आय मिलो किरपाकर स्वामी।
मीरा दासी जनम-जनम की, पड़ी तुम्हारे पाय।।
पाठांतर
प्यारे दरसण दीयो आय थें बिण रह्या णा जाय।।टेक।।
जल बिण कवल चंद बिण रजनी, थें बिण जीवण जाय।
आकुल व्याकुल रैण बिहावा, बिरह कलेजो खाय।
दिवस ना भूख न निदरा रैणा, मुखाँ सूं कह्या न जाय।
कोण सुणे कासूँ कहियारी, मिल पिव तपन बुझाय।
तक्यूँ तरसावाँ अन्तरजामी, आय मिलो दुख जाय।
मीरां दासी जनम जनम री, थारो नेह लगाय।।
जल बिन कमल, चंद बिन रजनी, ऐसे तुम देख्याँ बिन सजनी।
आकुल व्याकुल फिरूँ रैन दिन, बिरह कालजो खाय।।
दिवस न भूख, नींद नहिं रैना, मुख सूं कथत न आवे बैना।
कहा कहूँ कछु कहत न आवै, मिलकर तपत बुझाय।।
क्यूँ तरसावो अन्तरजामी, आय मिलो किरपाकर स्वामी।
मीरा दासी जनम-जनम की, पड़ी तुम्हारे पाय।।
पाठांतर
प्यारे दरसण दीयो आय थें बिण रह्या णा जाय।।टेक।।
जल बिण कवल चंद बिण रजनी, थें बिण जीवण जाय।
आकुल व्याकुल रैण बिहावा, बिरह कलेजो खाय।
दिवस ना भूख न निदरा रैणा, मुखाँ सूं कह्या न जाय।
कोण सुणे कासूँ कहियारी, मिल पिव तपन बुझाय।
तक्यूँ तरसावाँ अन्तरजामी, आय मिलो दुख जाय।
मीरां दासी जनम जनम री, थारो नेह लगाय।।
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