Monday, 24 December 2018

रमईया मेरे तोही सूं लागी नेह

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रमईया मेरे तोही सूं लागी नेह।।टेक।।
लागी प्रीत जिन तोड़ै रे वाला, अधिकौ कीजै नेह।
जै हूँ ऐसी जानती रे बाला, प्रीत कीयाँ दुष होय।
नगर ढँढोरो फेरती रे, प्रीत करो मत कोय।
वीर न षाजे आरी रे, मूरष न कीजै मिन्त।
षिण तात षिण सीतला रे, षिण वैरी षिण मिन्त।
प्रीत करै ते बाबरा रे, करि तोड़ै ते कूर।
प्रीत निभावण दल के षभण, ते कोई बिरला सूर।
तम गजगीरी कों चूँतरौरे, हम बालू की भीत।
अब तो म्याँ कैसे ब्रणै रै, पूरब जनम की प्रीत।
एकै थाणे रोपिया रे, इक आँबो इक बूल।
बाकौ रस नीकौ लगै रै, बाकी भागे सूल।
ज्यूं डूगर का बाहला रे, यूँ ओछा तणा स्नेह।
बहता बहेजी उतावरा रे, वे तो सटक बतावे छेह।
आयो साँवण भादवा रे, बोलण लागा मोर।
मीराँ कूँ हरिजन मिल्या रे, ले गया पवन झकोर।।

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