Monday, 10 December 2018
णेणाँ लोभाँ अटकां शवयाँणा फिर आय।
णेणाँ लोभाँ अटकां शवयाँणा फिर आय।।टेक।।
रूँम रूँम नखशिख लख्याँ, ललक ललक अकुलाय।
म्हाँ ठाढ़ी घर आपणै, मोहन निकल्याँ आय।
बदन चन्द परगासताँ, मन्द मन्द मुसकाय।
सकल कुटम्बां बरजतां, बोल्या बोल बनाय।
णेणा चञ्चल, अटक णा माण्या, परहथ गयाँ बिकाय।
भलो कह्याँ कांई कह्याँ बुरोरी सब लया सीस चढ़ाय।
मीराँ रे प्रभु गिरधरनागर बिण पर रह्याँ णा जाय।।
रूँम रूँम नखशिख लख्याँ, ललक ललक अकुलाय।
म्हाँ ठाढ़ी घर आपणै, मोहन निकल्याँ आय।
बदन चन्द परगासताँ, मन्द मन्द मुसकाय।
सकल कुटम्बां बरजतां, बोल्या बोल बनाय।
णेणा चञ्चल, अटक णा माण्या, परहथ गयाँ बिकाय।
भलो कह्याँ कांई कह्याँ बुरोरी सब लया सीस चढ़ाय।
मीराँ रे प्रभु गिरधरनागर बिण पर रह्याँ णा जाय।।
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