Tuesday, 11 December 2018
तुम्हरे कारण सब छोड्या, अब मोहि क्यूं तरसावौ हौ
तुम्हरे कारण सब छोड्या, अब मोहि क्यूं तरसावौ हौ।
बिरह-बिथा लागी उर अंतर, सो तुम आय बुझावौ हो॥
अब छोड़त नहिं बड़ै प्रभुजी, हंसकर तुरत बुलावौ हौ।
मीरा दासी जनम जनम की, अंग से अंग लगावौ हौ॥
पाठांतर
तुमर कारण सब सुख छाँड्यां, अब मोही क्यूं तरसावो हो।।टेक।।
बिरह बिथा लागी उर अन्तर, सो तुम आन बुझावो हो।
अब छोड़त नाहिं बणै प्रभु जी, हँसि करि तुरन्त बुलावौ हो।
मीराँ दासी जनम जनम की अँग से अँग लगावौ हो।।
बिरह-बिथा लागी उर अंतर, सो तुम आय बुझावौ हो॥
अब छोड़त नहिं बड़ै प्रभुजी, हंसकर तुरत बुलावौ हौ।
मीरा दासी जनम जनम की, अंग से अंग लगावौ हौ॥
पाठांतर
तुमर कारण सब सुख छाँड्यां, अब मोही क्यूं तरसावो हो।।टेक।।
बिरह बिथा लागी उर अन्तर, सो तुम आन बुझावो हो।
अब छोड़त नाहिं बणै प्रभु जी, हँसि करि तुरन्त बुलावौ हो।
मीराँ दासी जनम जनम की अँग से अँग लगावौ हो।।
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