Tuesday, 4 December 2018

आवत मोरी गलियन में गिरधारी।

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आवत मोरी गलियन में गिरधारी। 
मैं तो छुप गई लाज की मारी।।टेक।। 
कुसुमल पाग केसरिया जामा, ऊपर फूल हजारी। 
मुकुट ऊपर छत्र बिराजे; कुण्डल की छबि न्यारी। 
आवत देखी किसन मुरारी, छिप गई राधा प्यारी। 
मोर मुकट मनोहर सोहै, नथनी की छवि न्यारी। 
गल मोतिन की माल बिराजे, चरण कमल बलिहारी। 
ऊभी राधा प्यारी अरज करत है, सुणजे किसन मुरारी। 
मीराँ के प्रभु गिरधरनागर, चरण कमल पर वारी।।

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