Tuesday, 4 December 2018

आली, सांवरे की दृष्टि मानो, प्रेम की कटारी है

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आली, सांवरे की दृष्टि मानो, प्रेम की कटारी है।।टेक।।
लागत बेहाल भई, तनकी सुध बुध गई,
तन मन सब व्यापो प्रेम, मानो मतवारी है॥
सखियां मिल दोय चारी, बावरी सी भई न्यारी,
हौं तो वाको नीके जानौं, कुंजको बिहारी॥
चंदको चकोर चाहे, दीपक पतंग दाहै,
जल बिना मीन जैसे, तैसे प्रीत प्यारी है॥ 
बिनती करूं हे स्याम, लागूं मैं तुम्हारे पांव,
मीरा प्रभु ऐसी जानो, दासी तुम्हारी है॥ 

पाठांतर
आली साँवरो की दृष्टि, मानूँ प्रेम री कटारी हें।।टेक।।
लगन बेहाल भई तन की सुधि बुद्धि गई। 
तनह में व्यापी पीर, मन मतवारी हें। 
सखियाँ मिलि दोय च्यारी, बावरी भई हें सारी। 
हौं तो वाको नीको जानों, कुँज को बिहारी हें। 
चन्द को चकरो चाहै, दीपक पतंग दाहें। 
जल बिना मरै मीन ऐसी प्रीत प्यारी हें। 
बिन देष्याँ कैसे जीवें कल न पड़त हीयै। 
जाय वाकूँ ऐसे कहियौ मीराँ तो तिहारी हें।।

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