Friday, 21 December 2018

दुआएं अर्श से टकराये dua arsh se takra jaaye

No comments :

मै अक्सर सोचती हु
के कभी किसी रोज तुम यु ही चलती ट्रेन मेरे सामने आ जाओगे
या कभी बाजारों में रंगीन कपडे खरीदते हुए तुम दिख जाओगे
या शायद कभी मंदिर में कोने में बैठे तुम दिखोगे मुझे
या फिर यु ही अनजान गलियों में तुम कभी सामने आ जाओगे
यु गुमान होता है के तुम जरूर एक दिन मेरे सामने गलती से आ जाओगे
मुझे देखकर गुनाह के बोझ या फिर बेशर्मी की हदें तोड़कर मुझसे नजरे चुराओगे
पर मेरा खुदा जानता है के मैं कितनी दुआए करती हु
के मेरे सामने कभी ना आओ
आज फिर इस दुआ से ये ग़ज़ल लिखती हु
के मेरी सोच कभी हकीकत की दुनिया को न छूने पाये
मेरी दुआए ही बस अब अर्श से टकराये


No comments :

Post a Comment

{js=d.createElement(s);js.id=id;js.src=p+'://platform.twitter.com/widgets.js';fjs.parentNode.insertBefore(js,fjs);}}(document, 'script', 'twitter-wjs');