Sunday, 9 December 2018

कीसनजी नहीं कंसन घर जावो

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कीसनजी नहीं कंसन घर जावो। राणाजी मारो नही॥टेक॥
तुम नारी अहल्या तारी। कुंटण कीर उद्धारो॥१॥
कुबेरके द्वार बालद लायो। नरसिंगको काज सुदारो॥२॥
तुम आये पति मारो दहीको। तिनोपार तनमन वारो॥३॥
जब मीरा शरण गिरधरकी। जीवन प्राण हमारो॥४॥

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