Friday, 21 December 2018

मैं तो तेरी सरण परी रे रामा

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मैं तो तेरी सरण परी रे रामा, ज्यूँ जाणे त्यूँ तार।।टेक।। 
अड़सठ तीरथ भ्रमि भ्रमि आयो, मनव नाहीं मानी हार।
या जग में कोई नहिं अपणाँ, सुणियौ श्रवण मुरार। 
मीराँ दासी राम भरोसे, जग का फंदा निवार।।

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