Monday, 24 December 2018
राणा जी अब न रहूंगी तोर हठ की
राणा जी...हे राणा जी
राणा जी अब न रहूंगी तोर हठ की
साधु संग मोहे प्यारा लागे
लाज गई घूंघट की
हार सिंगार सभी ल्यो अपना
चूड़ी कर की पटकी
महल किला राणा मोहे न भाए
सारी रेसम पट की
राणा जी... हे राणा जी
जब न रहूंगी तोर हठ की
भई दीवानी मीरा डोले
केस लटा सब छिटकी
राणा जी... हे राणा जी!
अब न रहूंगी तोर हठ की।
पाठांतर
राणा जी! अब न रहूँगी तोरी हटकी ।।टेक।।
साध संग मोहि प्यारा लागै, लाज गई घूँघट की।
पीहर मेड़ता छोड़ा आपण, सुरत निरत दोऊ चटकी।
सतगुरू मुकुर दिखाया घट का, नाचूँगी दे दे चुटकी।
हार सिंगार सभी ल्यो अपना, चूड़ा कर की पटकी।
मेरा सुहाग अब मोकूँ दरसा, और व जाते घट की।
महल किलां राणा मोंहि न चाहिए, सारी रेशम पट की।
हुई दिवानी मीरां डोलै, केस लटा सब छिटकी।।
राणा जी अब न रहूंगी तोर हठ की
साधु संग मोहे प्यारा लागे
लाज गई घूंघट की
हार सिंगार सभी ल्यो अपना
चूड़ी कर की पटकी
महल किला राणा मोहे न भाए
सारी रेसम पट की
राणा जी... हे राणा जी
जब न रहूंगी तोर हठ की
भई दीवानी मीरा डोले
केस लटा सब छिटकी
राणा जी... हे राणा जी!
अब न रहूंगी तोर हठ की।
पाठांतर
राणा जी! अब न रहूँगी तोरी हटकी ।।टेक।।
साध संग मोहि प्यारा लागै, लाज गई घूँघट की।
पीहर मेड़ता छोड़ा आपण, सुरत निरत दोऊ चटकी।
सतगुरू मुकुर दिखाया घट का, नाचूँगी दे दे चुटकी।
हार सिंगार सभी ल्यो अपना, चूड़ा कर की पटकी।
मेरा सुहाग अब मोकूँ दरसा, और व जाते घट की।
महल किलां राणा मोंहि न चाहिए, सारी रेशम पट की।
हुई दिवानी मीरां डोलै, केस लटा सब छिटकी।।
Subscribe to:
Post Comments
(
Atom
)
No comments :
Post a Comment