Saturday, 1 December 2018
ऊँचा-ऊँचा पाबत, तहिं वसै सबरी वाला
ऊँचा-ऊँचा पाबत, तहिं वसै सबरी वाला।
मोरंगी पिच्छि पहिरहि सबरी गीवत गुजरी माला।
ऊमत सबरो पागल सबरो मा कर गुली-गुहाड़ा।
तोहारि णिअ धरिणी सहज सुन्दरी। ध्रु ।
णाणा तरुवर मौलिल रे, गअणत लागेलि डाली।
एकली सबरी ए वन हिण्डइ, कर्ण कुण्डल वज्रधारी।
तिउ धाउ खाट पडिला सबरो, महासुह सेज्जि छाइली।
सबरो भुजंग णइरामणि दारी, पेक्ख (त) राति पोहाइली।
हिए ताबोला माहासुहे कापुर खाई।
सून निरामणि कण्ठे लइया महासुहे राति पोहाई।
गुरु वाक पुंछआ बिन्धणिअ मणे वाणें।
एके शर-सन्धाने गरुआ रोषे,
गिरिवर सिहर सन्धि पैसन्टे सबरो लोडिब कइसे।
मोरंगी पिच्छि पहिरहि सबरी गीवत गुजरी माला।
ऊमत सबरो पागल सबरो मा कर गुली-गुहाड़ा।
तोहारि णिअ धरिणी सहज सुन्दरी। ध्रु ।
णाणा तरुवर मौलिल रे, गअणत लागेलि डाली।
एकली सबरी ए वन हिण्डइ, कर्ण कुण्डल वज्रधारी।
तिउ धाउ खाट पडिला सबरो, महासुह सेज्जि छाइली।
सबरो भुजंग णइरामणि दारी, पेक्ख (त) राति पोहाइली।
हिए ताबोला माहासुहे कापुर खाई।
सून निरामणि कण्ठे लइया महासुहे राति पोहाई।
गुरु वाक पुंछआ बिन्धणिअ मणे वाणें।
एके शर-सन्धाने गरुआ रोषे,
गिरिवर सिहर सन्धि पैसन्टे सबरो लोडिब कइसे।
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