Sunday, 31 March 2019

आईना देख अपना सा मुंह लेके रह गये aaina dekh ke apna muh

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आईना देख अपना सा मुंह लेके रह गये
साहिब को दिल न देने पे कितना ग़ुरूर था

क़ासिद को अपने हाथ से गरदन न मारिये
उस की ख़ता नहीं है यह मेरा क़सूर था


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