Sunday, 31 March 2019

मुस्कराहटें फिर वोही muskrahate fir vohi

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शाम से धुँआ कोई,
आँखों मे उड़ने लगा कही,
जलते हुए कुछ खवाब है
सहमी हुई कुछ साँस है
कोई दे मुस्कराहटें फिर वोही



Ruchi Sehgal

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