Wednesday, 13 March 2019
हसरत ऐ जाँ शब-ए-जुदाई है, hasrat ae jaa shab ae judai
हसरत ऐ जाँ शब-ए-जुदाई है
मुज़दा ऐ दिल के मौत आई हैं
फिर गया जब से वो सनम ब-ख़ुदा
हम से बर्गश्ता इक ख़ुदाई है
तुम मेरे कज़-कुलाह को देखो
ये भला किस में मीरजाई है
दिल में आता है राह-ए-चश्म से वो
ख़ूब-ये राह-ए-आशनाई है
ज़ाहिदो कुदरत-ए-ख़ुदा देखो
बुत को भी दावा-ए-ख़ुदाई है
काबे जाने से मना करते हैं
क्या बुतों के ही घर ख़ुदाई है
हुस्न ने मुल्क-ए-दिल किया ताराज
हज़रत-ए-इश्क़ की दुहाई है
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