Wednesday, 13 March 2019
आज उनसे मुद्दई कुछ मुद्दआ कहने को है
आज उनसे मुद्दई कुछ मुद्दआ कहने को है
यह नहीं मालूम क्या कहवेंगे क्या कहने को है
देखे आईने बहुत, बिन ख़ाक़ हैं नासाफ़ सब
हैं कहाँ अहले-सफ़ा, अहले-सफ़ा कहने को हैं
दम-बदम रूक-रुक के है मुँह से निकल पड़ती ज़बाँ
वस्फ़ उसका कह चुके फ़व्वारे या कहने को है
देख ले तू पहुँचे किस आलम से किस आलम में है
नालाहाए-दिल हमारे नारसा कहने को है
बेसबब सूफ़ार उनके मुँह नहीं खोंलें है 'ज़ौक़'
आये पैके-मर्ग पैग़ामे-क़ज़ा कहने को है
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