Wednesday, 13 March 2019
तेरे कूचे को वोह बीमारे-ग़म दारुलशफा समझे, tere kooche ko voh bimaar
तेरे कूचे को वोह बीमारे-ग़म दारुलशफा समझे
अज़ल को जो तबीब और मर्ग को अपनी दवा समझे
सितम को हम करम समझे जफ़ा को हम वफ़ा समझे
और इस पर भी न समझे वोह तो उस बुत से ख़ुदा समझे
समझ ही में नहीं आती है कोई बात ‘ज़ौक़’ उसकी
कोई जाने तो क्या जाने,कोई समझे तो क्या समझे
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