Wednesday, 13 March 2019
क्या ग़रज़ लाख ख़ुदाई में हों दौलत वाले kya garaz laakh khudai mei ho
क्या ग़रज़ लाख ख़ुदाई में हों दौलत वाले
उनका बन्दा हूँ जो बन्दे हैं मुहब्बत वाले
गए जन्नत में अगर सोज़े महब्बत वाले
तो ये जानो रहे दोज़ख़ ही में जन्नत वाले
न सितम का कभी शिकवा न करम की ख़्वाहिश
देख तो हम भी हैं क्या सब्र-ओ-क़नाअ़त वाले
नाज़ है गुल को नज़ाक़त पै चमन में ऐ ‘ज़ौक़’
इसने देखे ही नहीं नाज़-ओ-नज़ाक़त वाले
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