Saturday, 6 April 2019
चाक की ख़्वाहिश, अगर वहशत ब-उरियानी करे chaak ki khwaish agar
चाक की ख़्वाहिश, अगर वहशत ब-उरियानी करे
सुबह के मानिन्द ज़ख़्म-ए-दिल गिरेबानी करे
जल्वे का तेरे वह आ़लम है कि गर कीजे ख़याल
दीदा-ए दिल को ज़ियारत-गाह-ए हैरानी करे
है शिकस्तन से भी दिल नौमीद या रब कब तलक
आब-गीना कोह पर अ़रज़-ए गिरां-जानी करे
मै-कदा गर चश्म-ए-मस्त-ए-नाज़ से पावे शिकसत
मू-ए-शीशा दीदा-ए-साग़र की मिज़ग़ानी करे
ख़त्त-ए-आ़रिज़ से लिखा है, ज़ुल्फ़ को उल्फ़त ने अ़हद
यक-क़लम मंज़ूर है, जो कुछ परेशानी करे
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