Thursday, 4 April 2019

जुनूं तोहमत-कशे-तस्कीं न हो, गर शादमानी की junoon tohmat kashe Taski na ho

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जुनूं तोहमत-कशे-तस्कीं न हो, गर शादमानी की
नमक-पाशे-ख़राशे-दिल है लज़्ज़त ज़िन्दगानी की

कशाकशा-ए-हस्ती से करे क्या सई-ए-आज़ादी
हुई ज़ंजीर, मौज-ए-आब को, फ़ुर्सत रवानी की

पस-अज़-मुर्दन भी दीवाना ज़ियारत-गाह-ए-तिफ़लां है
शरार-ए-संग ने तुरबत पे मेरी गुल-फ़िशानी की


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