Saturday, 6 April 2019

वो आके ख़्वाब में तस्कीन-ए-इज़्तिराब तो दे vo aake task8n ae ijtiraab to de

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वो आके ख़्वाब में तस्कीन-ए-इज़्तिराब तो दे
वले मुझे तपिश-ए-दिल मजाल-ए-ख़्वाब तो दे

करे है क़त्ल, लगावट में तेरा रो देना
तेरी तरह कोई तेग़े-निगह की आब तो दे

दिखा के जुंबिश-ए-लब ही तमाम कर हमको
न दे जो बोसा, तो मुँह से कहीं जवाब तो दे

पिला दे ओक से साक़ी, जो हमसे नफ़रत है
प्याला गर नहीं देता न दे, शराब तो दे

"असद" ख़ुशी से मेरे हाथ-पाँव फूल गए
कहा जो उसने, ज़रा मेरे पाँव दाब तो दे


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