Saturday, 6 April 2019

ख़तर है, रिश्ता-ए-उल्फ़त रग-ए-गरदन न हो जावे khatar hai rishta ae ulfat rang ae gardan

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ख़तर है, रिश्ता-ए-उल्फ़त रग-ए-गरदन न हो जावे
ग़ुरूर-ए-दोस्ती आफ़त है, तू दुश्मन न हो जावे

समझ इस फ़सल में कोताही-ए-नश्व-ओ-नुमा ग़ालिब
अगर गुल सर्व के क़ामत पे पैराहन न हो जावे


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