Wednesday, 7 June 2017
मुँह तका ही करे है जिस-तिस का
मुँह तका ही करे है जिस-तिस का
हैरती है ये आईना किस का
जाने क्या गुल खिलाएगी गुल-रुत
ज़र्द चेह्रा है डर से नर्गिस का
शाम ही से बुझा-सा रहता है
दिल हो गोया चराग़ मुफ़लिस का
आँख बे-इख़्तियार भर आई
हिज्र सीने में जब तेरा सिसका
थे बुरे मुगाबचो के तेवर लेक
शैख़ मयखाने से भला खिसका
फ़ैज़ ये अब्र-ए-चश्म-ए-तर से उठा
आज दामन वसीअ है इस का
ताब किस को जो हाल-ऐ-'मीर' सुने
हाल ही और कुछ है मजलिस का
हैरती है ये आईना किस का
जाने क्या गुल खिलाएगी गुल-रुत
ज़र्द चेह्रा है डर से नर्गिस का
शाम ही से बुझा-सा रहता है
दिल हो गोया चराग़ मुफ़लिस का
आँख बे-इख़्तियार भर आई
हिज्र सीने में जब तेरा सिसका
थे बुरे मुगाबचो के तेवर लेक
शैख़ मयखाने से भला खिसका
फ़ैज़ ये अब्र-ए-चश्म-ए-तर से उठा
आज दामन वसीअ है इस का
ताब किस को जो हाल-ऐ-'मीर' सुने
हाल ही और कुछ है मजलिस का
munh taka hee kare hai jis-tis ka
hairatee hai ye aaeena kis ka
jaane kya gul khilaegee gul-rut
zard chehra hai dar se nargis ka
shaam hee se bujha-sa rahata hai
dil ho goya charaag mufalis ka
aankh be-ikhtiyaar bhar aaee
hijr seene mein jab tera sisaka
the bure mugaabacho ke tevar lek
shaikh mayakhaane se bhala khisaka
faiz ye abr-e-chashm-e-tar se utha
aaj daaman vasee hai is ka
taab kis ko jo haal-ai-meer sune
haal hee aur kuchh hai majalis ka
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